गुरुवार, 12 मार्च 2015

There were also plenty of childhood , how , how the game ! Run boat in the sand , fly sky rail !!

बचपन में भी खूब थे ,कैसे- कैसे खेल !
नाव चलाते रेत में,उड़ती नभ में रेल !!

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (14-03-2015) को "माँ पूर्णागिरि का दरबार सजने लगा है" (चर्चा अंक - 1917) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत ही सुंदर प्रस्‍तुति।

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