गुरुवार, 12 मार्च 2015


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आप सभी मित्रों के समक्ष ----तितली है खामोश---- की नौवीं पोस्ट सादर हाज़िर है ...आपके सुझावों और प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा में .....आपका दोस्त .....सत्यवान वर्मा सौरभ
तितली है खामोश ४०-४५
रखते जितना साफ़ है,मन से पूजा-पाठ !
वैसे घर-गालियां बने,हो जायेंगे ठाठ !!
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जाति-धर्म है बाद में,पहले है इंसान !
बूँद-बूँद पानी बचे,करे सभी ये ध्यान !!
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बिन पानी के जग लगे,सूखा रेगिस्तान !
पानी से ही मानिये,जीवन ये श्रीमान !!
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धरती कहे किसान से,जाओ अब तो चेत!
काट -काटकर खा गए,रासायन खुद खेत !!
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उड़ते पंछी कह रहे,छोडो मजहब यार !
थोड़ा उठकर देखिये,छोटा सा संसार !!
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