गुरुवार, 12 मार्च 2015

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आप सभी मित्रों के समक्ष ----तितली है खामोश---- की पांचवी पोस्ट सादर हाज़िर है ...आपके सुझावों और प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा में .....आपका दोस्त .....सत्यवान वर्मा सौरभ
तितली है खामोश २०-२५

जब गाता हूँ गीत मैं ,खनक उठे अवसाद !
पता नही किस बात की,मिलती मुझको दाद !!
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आंसू भी कुछ कह रहे,देखो मन से बांच !
हाल हृदय का बोलते,जैसे तन का कांच !!
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तन से तन का मेल तो,किस्मत का त्यौहार !
मन से मन का बोलना,मन-भावन उपहार !!
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चादर एक समेटती,दुखियों का संसार !
दर्द-दर्द को जानता,जुड़ता मन का प्यार !!
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प्रेम-करुणा-स्नेह का,जिस घर में हो वास !
ऎसे घर आँगन सदा,रहें खूब उल्लास !!
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----सत्यवान वर्मा सौरभ
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 —Ramniwas

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