रविवार, 15 मार्च 2015

Dry tree was saying he passed that time ! The green body was ever so beloved go !!

सूखा दरख़्त कह रहा.वक़्त गया वो बीत !
हरे जिस्म से थी कभी,जाने कितनी प्रीत !!
 

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