मंगलवार, 17 मार्च 2015

नारी तन को बेचती,आया कैसा दौर ! मूर्त अब वो प्यार की,दिखती है कुछ और !!


नारी तन को बेचती,आया कैसा दौर !
मूर्त अब वो प्यार की,दिखती है कुछ और !!

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