बुधवार, 25 फ़रवरी 2015

आप सभी मित्रों के समक्ष ----तितली है खामोश---- की पहली पोस्ट सादर हाज़िर है ...आपके सुझावों और प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा में .....आपका दोस्त .....सत्यवान वर्मा सौरभ 

तितली है खामोश १-५ 

हर कविता में है छुपी,कवि हरदय की पीर !
दुःख मीरा का है कहीं,रोता कहीं कबीर !!
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दोहे,कविता ,गीत सब,मन से निकले छंद !
भरा सभी में एक-सा,भावों का मकरंद !!
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खूब मिली यूं वेदना,लगी चोट पर चोट !
मेरी सच्ची साधना,जैसे मुझमे खोट !!
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सजनी तेरे प्यार में,कैसी बात अजीब !
जाती जितना दूर हो,लगती मुझे करीब !!
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भाव शून्य कविता हुई,गीत हुए अनबोल !
शब्द बिके बाजार में,अब कौड़ी के मोल !!

आप सभी मित्रों के समक्ष ----तितली है खामोश---- की दूसरी पोस्ट सादर हाज़िर है ...आपके सुझावों और प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा में .....आपका दोस्त .....सत्यवान वर्मा सौरभ
तितली है खामोश ६ -१० 

पंछी रोते देखकर,अपना उजड़ा गाँव !
कहाँ बचे अब पेड़ है,रही कहाँ है छावं!! 
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देखो उतरे कोट का,लगता मोल करोड़ !
वरदी कचरे में मिले,वीर गए जो छोड़ !!
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तोल-मोल के हो गए,कोरट और कानून !
बिन खंजर के देखिये,होते अब तो खून !!
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मुझको भाते आज भी,बचपन के वो गीत !
लोरी गाती मात की,अजब निराली प्रीत !!
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बहरों के संसार में,बोलो किसकी चूक !
लुटती बेटी रोड पर,लोग देखते मूक !!

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