शुक्रवार, 4 जुलाई 2014

यार तू जिगर एक आसमानी बन !

आंधी की ना बात कर तूफानी बन !!

क्यों जला रहा खुद से ही खुद को ,

अगर वो आग है तू तो पानी बन !

तुझे क्या हुआ जो उन्होंने भुला दिया,

तेरी याद सताए ऐसी निशानी बन !

वक़्त के साथ बदले,बदलेंगे रिश्ते ,

तेरे दिल में सदा रहे वो जवानी बन !

ग़ज़लें तो बहुत लिखी ग़ालिब ने भी ,

ये नया दौर है नई एक कहानी बन !

क्या कर लेगी ये पतझर सौरभ का,;;

बस सावन की फुहार मस्तानी बन !

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