सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

माँ

माँ कविता है, गीत है, है ममता  की खान !
इस धरती पे है वही,. एक रूप भगवान!!

ममता मानो चल बसी, लज्जित माँ की जात !
बीच झाड़ियों जब मिला , एक शिशु नवजात !!

 

1 टिप्पणी: