मंगलवार, 27 सितंबर 2011

फूलों का अहसास !

कांटें साथी जानिए , होते कांटें नेक !
रहके काँटों बीच ही , खिलते फूल अनेक !!

बीते कल को भूल के, चुग डाले सब शूल!
बोये हम नवभोर पे, सुंदर-सुरभित फूल !!

पायेगा तू भी कभी, फूलों की सौगात !
धुन अपनी मत छोड़ना, सुधरेंगें हालात!!

आओ  काँटों में भरें , फूलों का अहसास !
महके -महके से रहे , धरती औ" आकाश !!

उठो चलो आगे बढ़ो, भूलो दुःख की बात !
आशाओं के रंग में , रंग लो फीर जज्बात !!

नए दौर में हम करे , ऐसा एक नव प्रयास !
शब्द जो ये कलम लिखे , बन जाये इतिहास !!


शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

अब कैसे गीत गाऊँ मैं !!

बिखेर चली तुम साज मेरा !
अब कैसे गीत गाऊँ मैं !!
तुमने ही जो ठुकरा दिया 
अब किस से प्रीत लगाऊं मैं !!

सूना -सूना सब तुम बिन 
रात अँधेरी फीके दिन !
तुम पे जो मैंने गीत लिखे 
किसको आज सुनाऊँ मैं!!

बिखरी - बिखरी सब आशाएं 
घेरे मुझको घोर निराशाएं !
नौका जो छूट गई हैं मुझसे 
अब कैसे साहिल पाऊँ मैं!!

रूठे स्वर ,रूठी मन -वीणा 
मुश्किल हुआ तन्हा जीना !
कहो कविते! अब तुम बिन
कैसे आज गुनगुनाऊँ मैं!!

सताती हर पल तेरी यादें 
बीता मौसम , बीता बातें !
टूटी कसमें ,टूटे सब वादें 
किस पे आज मर जाऊं मैं!!

शिक्षक

वह बुझे हुए दीप भी जला सकता हैं,
अज्ञान को दूर शिक्षक भगा सकता हैं!
अपने ज्ञान के जादू से वह-
इस धरती को स्वर्ग बना सकता हैं!!

शिक्षकों की कथनी में बड़ी शक्ति हैं,
धार ज्यों तलवार की ताकत रखती हैं!
लौ इनके ज्ञान की जब हैं फैलती तो 
देश का इतिहास बदल सकती हैं!!

अ ! देश के शिक्षकों आँखें खोलों ,
कर्तव्य की तुला पे स्वयं को तोलो !
अर्जुन से शिष्य जो करते   थे पैदा]
 आज वो गुरु द्रोण कहाँ हैं बोलो !!

यह देश कभी अनपढ़, मजबूर न बने,
विज्ञानं से ज्ञान से भरपूर बने !
इच्छा हैं मेरे ज्ञान का कण-कण
सरस्वती की मांग का सिन्दूर बने!!