रविवार, 16 अक्तूबर 2011

टूट गए अनुबंध

मन रहता व्याकुल सदा, पाने माँ का प्यार !
लिखी मात की पतियाँ, बांचूं बार हज़ार !!

अंतर्मन गोकुल हुआ, जाना जिसने प्यार !
मोहन हृदय में बसे, रहते नहीं विकार !!

बना दिखावा प्यार अब, लेती हवास उफान !
राधा के तन पे लगा, अब मोहन का ध्यान !!

बस पैसों के दोस्त हैं, बस पैसों से प्यार !
बैठ सुदामा सोचता,मिले कहाँ अब यार !!

दुखी गरीबों पे सदा, जो बाँटें हैं प्यार !
सपने उसके सब सदा, होते हैं साकार !!

आपस में जब प्यार हो , फलें खूब व्यवहार !
रिश्तों की दीवार में, पड़ती नहीं दरार !! 

नवभोर में  फूलें  फलें , मन में निश्चल प्यार !
आँगन-आँगन फूल हो , महकें बसंत बहार !!

रखें हृदय में प्यार जो, बांटें हृदय में प्यार !
उसके घर आँगन सदा, आये दिन त्यौहार !!

जहाँ महकता प्यार हो, धन न बने दीवार !
वहां कभी होती नहीं, आपस में तकरार !!

प्यार वासनामय हुआ, टूट गए अनुबंध !
बिखरे-बिखरे से लगे, अब मीरा के छंद !!

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