मंगलवार, 27 सितंबर 2011

फूलों का अहसास !

कांटें साथी जानिए , होते कांटें नेक !
रहके काँटों बीच ही , खिलते फूल अनेक !!

बीते कल को भूल के, चुग डाले सब शूल!
बोये हम नवभोर पे, सुंदर-सुरभित फूल !!

पायेगा तू भी कभी, फूलों की सौगात !
धुन अपनी मत छोड़ना, सुधरेंगें हालात!!

आओ  काँटों में भरें , फूलों का अहसास !
महके -महके से रहे , धरती औ" आकाश !!

उठो चलो आगे बढ़ो, भूलो दुःख की बात !
आशाओं के रंग में , रंग लो फीर जज्बात !!

नए दौर में हम करे , ऐसा एक नव प्रयास !
शब्द जो ये कलम लिखे , बन जाये इतिहास !!


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