शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

अब कैसे गीत गाऊँ मैं !!

बिखेर चली तुम साज मेरा !
अब कैसे गीत गाऊँ मैं !!
तुमने ही जो ठुकरा दिया 
अब किस से प्रीत लगाऊं मैं !!

सूना -सूना सब तुम बिन 
रात अँधेरी फीके दिन !
तुम पे जो मैंने गीत लिखे 
किसको आज सुनाऊँ मैं!!

बिखरी - बिखरी सब आशाएं 
घेरे मुझको घोर निराशाएं !
नौका जो छूट गई हैं मुझसे 
अब कैसे साहिल पाऊँ मैं!!

रूठे स्वर ,रूठी मन -वीणा 
मुश्किल हुआ तन्हा जीना !
कहो कविते! अब तुम बिन
कैसे आज गुनगुनाऊँ मैं!!

सताती हर पल तेरी यादें 
बीता मौसम , बीता बातें !
टूटी कसमें ,टूटे सब वादें 
किस पे आज मर जाऊं मैं!!

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें